मैं अपने 6 साल के बच्चों के रवैये से कैसे निपटूं?HealthPlanet

Posted on Thu 2nd Mar 2023 : 09:35

कहते हैं कि छोटे बच्‍चों के साथ छोटी परेशानियां और बड़े बच्‍चों के साथ बड़ी परेशानियां आती हैं। लेकिन जो बच्‍चे न छोटे होते और न बड़े होते यानि 6 से 9 साल के बच्‍चों की परवरिश में और भी ज्‍यादा एहतियात बरतनी पड़ती है।

अगर आपको लगता है कि बच्‍चे छोटे हैं और अभी आपको उन्‍हें कुछ ज्‍यादा समझाने या सिखाने की जरूरत नहीं है तो आप गलत हैं। यही उम्र होती है जब बच्‍चे की अच्‍छी परवरिश और संस्‍कारों की नींव रखी जाती है। इसी समय बच्‍चे को अच्‍छी आदतें भी सिखानी होती हैं जो जिंदगीभर उसके साथ रहती हैं।

यदि आपका बच्‍चा 6 से 9 साल का है, तो यहां जानें उसकी पेरेंटिंग में पेरेंट्स को किन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए और उसे किस तरह की आदतें डालनी चाहिए ता‍कि वो आगे चलकर एक सफल और समझदार इंसान बन सके।

​खाने का समय

बच्‍चों की ईटिंग हैबिट्स और भूख में अचानक बदलाव आना नॉर्मल होता है। आपको इस समय बच्‍चे के खाने में ज्‍यादा से ज्‍यादा हेल्‍दी चीजों को शामिल करने की कोशिश करनी है।

आप उसे दूध, दही, सब्जियां और चीज आदि खिलाएं और जंक फूड से दूर रखें। हालांकि, बच्‍चे को जबरदस्‍ती न खिलाएं और उसे अपना खाना एंजॉय करने दें।

​अपनी सेफ्टी समझाएं

इस उम्र के बच्‍चे सबसे ज्‍यादा शैतान होते हैं इसलिए इनके साथ एक्‍सीडेंट होने का भी सबसे ज्‍यादा खतरा रहता है। इसलिए इस समय बच्‍चों को उनकी खुद की सेफ्टी के बारे में सिखाना चाहिए।

बच्‍चे को रोड़ क्रॉस करना सिखाएं और कोई अजनबी अगर उससे आकर बात करता है, तो उसे किस तरह उससे बात करनी है, ये सब चीजें सिखाएं।

​स्‍क्रीन टाइम की लिमिट

आजकल बच्‍चों के लिए तरह-तरह की टेक्‍नोलॉजी आ गई हैं लेकिन बच्‍चों का इनका इस्‍तेमाल पेरेंट्स की देख-रेख में ही करनी चाहिए। बच्‍चों के लिए टीवी, स्‍मार्टफोन और टैबलेट आदि गैजेट्स के कुछ नुकसान भी हैं इसलिए उन्‍हें ज्‍यादा देर तक इन चीजों का इस्‍तेमाल नहीं करने देना चाहिए।

गैजेट्स के इस्‍तेमाल से बच्‍चा आलसी और गुस्‍सैल हो जाता है। इसलिए बच्‍चे के लिए स्‍क्रीन टाइम की एक लिमिट बनाएं। इसकी बजाय उसे कोई क्रिएटिव काम करवाएं।

फिजीकल एक्टिविटी है जरूरी

बच्‍चों के लिए दिनभर में कम से कम एक घंटे तो फिजीकल एक्टिविटी जैसे कि रनिंग या कोई स्‍पोर्ट जरूर खेलने के लिए कहें। बच्‍चों के लिए आउटडोर गेम्‍स बहुत फायदेमंद होते हैं। इससे बच्‍चों की हाइट बढ़ने में मदद मिलती है और मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं।

​पढ़ाई पर दें ध्‍यान

इस उम्र में तो बच्‍चों ने पढ़ाई करना शुरू ही किया होता है इसलिए पेरेंट्स को उनकी पढ़ाई पर भी ध्‍यान देना चाहिए। बच्‍चे को भी पढ़ाई और होमवर्क के बारे में ज्‍यादा पता नहीं होगा इसलिए उसे आपकी हेल्‍प की जरूरत होगी।

आप उसे ट्यूशन भी दिलवा सकते हैं। इससे उसे अपनी पढ़ाई को समझने में काफी मदद मिलेगी।

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